श्रीमद्भगवद्गीता के अनमोल वचन

  1. सदैव संदेह करने वाले व्यक्ति के लिए प्रसन्नता ना इस लोक में  है ना ही कहीं और.
  2. क्रोध से  भ्रम  पैदा होता है. भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती है. जब बुद्धि व्यग्र होती है तब तर्क नष्ट हो जाता है. जब तर्क नष्ट होता है तब व्यक्ति का पतन हो जाता है.
  3.  मन की गतिविधियों, होश, श्वास, और भावनाओं के माध्यम से भगवान की शक्ति सदा तुम्हारे साथ है; और लगातार तुम्हे बस एक साधन की तरह प्रयोग कर के सभी कार्य कर रही है.
  4. ज्ञानी व्यक्ति ज्ञान और कर्म को एक रूप में देखता है, वही सही मायने में  देखता है.
  5. जो मन को नियंत्रित नहीं करते उनके लिए वह शत्रु के समान कार्य करता है.
  6. अपने अनिवार्य कार्य करो, क्योंकि वास्तव में कार्य करना निष्क्रियता से बेहतर है.
  7. आत्म-ज्ञान की तलवार से काटकर अपने ह्रदय से अज्ञान के संदेह को  अलग कर दो. अनुशाषित रहो. उठो.
  8. मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता है.जैसा वो विश्वास करता है वैसा वो बन जाता है.
  9. नर्क के तीन द्वार हैं: वासना, क्रोध और लालच.
  10. इस जीवन में ना कुछ खोता है ना व्यर्थ होता है.
https://i0.wp.com/www.shyamsakha.in/wp-content/uploads/2016/10/anmol-vachan-in-hindi.gif?fit=1024%2C768https://i0.wp.com/www.shyamsakha.in/wp-content/uploads/2016/10/anmol-vachan-in-hindi.gif?resize=150%2C150adminश्याम शायरीanmol vachan in hindi,anmol vachana,shyam baba quotes in hindiश्रीमद्भगवद्गीता के अनमोल वचन सदैव संदेह करने वाले व्यक्ति के लिए प्रसन्नता ना इस लोक में  है ना ही कहीं और. क्रोध से  भ्रम  पैदा होता है. भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती है. जब बुद्धि व्यग्र होती है तब तर्क नष्ट हो जाता है. जब तर्क नष्ट होता है तब व्यक्ति का पतन हो जाता है.  मन...Hare Ka Sahara, Baba Syam Hamara